Tuesday, April 24, 2007

कौन चिरनिद्रा में लीन है ?

सब कुछ साझा-२
के पी सिंह

शायद आप जानकर हैरत में पड़ जाये कि अयोध्या में ऐसे झगडे हैं भी नही और कई जगहों पर हिंदुओं व मुसलमानो की श्रद्धा के केंद्र्स्थल इस तरह पास पास स्थित हैं जैसे देश की गंगा-जमुनी संस्कृति वहीँ आकर साकार हो गयी हो। मुस्लिम स्थलों की दृष्टि से भी अयोध्या की अहमियत कुछ कम नही बल्कि बढ़ी चढ़ी ही है। इतनी कि लोग इसे आलोचना किये जाने का खतरा उठाकर भी इसे "पैगम्बरों की नगरी" या "मक्का ख़ुर्द" की संज्ञा दिया करते हैं। उनका कहना है कि जैसे मक्का में जंग हराम है विअसे ही अयोध्या में भी युद्ध नही होते। यह जरूर है कि इधर कई लोग ऐसे कथनो को लेकर भी बतंगड़ पर उतरने लगे हैं। मगर आम तौर पर अयोध्या के लोग उन्हें कान नही देते।
इस्लाम के पवित्रतम स्थलों मे से एक "शीश पैगम्बर" तो, जहाँ तमाम श्रद्धालु, धर्म का भेद किये बिना, अपनी तरह तरह की विकृतियाँ दूर होने की कामना लिए चले आते हैं, उस प्रख्यात मणि पर्वत के एकदम निकट है,जहाँ से अयोध्या का प्रख्यात सावन झूलनोत्सव शुरू होता है। महाराजा कॉलेज के निकट स्थित बेगम बल्लाश की मस्जिद तो ऎसी है कि देखने वालो को छह दिसंबर,१९९२ को ढहा दीं गयी बाबरी मस्जिद का भ्रम होने लगे।
इसके अतिरिक्त कोतवाली के ठीक बगल ही वह नौगजी कब्र है जो अपने आकर को लेकर आकर्षण का केंद्र बनी रहती है। लोग इसे देखते हैं तो दांतो तले ऊँगली दबा लेते हैं। कौन चिरनिद्रा में लीं है इस इतनी बड़ी कब्र में ? इस्लाम के कई अनुयायी इसे पैगम्बर नूह की कब्र बताते हैं जबकि कई अन्य का कहना है कि इसमे पैगम्बर नूह की रहस्यमय किश्ती के टुकड़े दफ़न किये गए हैं।
(जारी....)

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