Sunday, November 30, 2014

नतमस्‍तक मोदक की नाजायज औलादें (15)

प्रश्‍न- भगत सिंह के साथ जेल में कौन कौन थे?
उत्‍तर- शेर अकेला ही रहता है
प्रश्‍न- और कोई नहीं रहता था उनके साथ जेल में?
उत्‍तर- रहते होंगे, उन्‍हीं के साथ के कोई
प्रश्‍न- क्‍या आपके लोग भगत सिंह के साथ जेल गए थे?
उत्‍तर- हां, हमने उस वक्‍त गि‍रफ्तारि‍यां दी थीं
प्रश्‍न- कि‍स वक्‍त?
उत्‍तर- आजादी के वक्‍त
प्रश्‍न- अपने कि‍सी नेता का नाम बताएंगे जि‍सने आजादी के आंदोलन में गि‍रफ्तारी दी?
उत्‍तर- बाल गंगाधर ति‍लक, स्‍वामी वि‍वेकानंद।
प्रश्‍न- बाल गंगाधर ति‍लक कहां बंद हुए थे?
उत्‍तर- शायद पंजाब जेल में
प्रश्‍न- गांधी जी को जानते हैं?
उत्‍तर- वो जो नोट पे छपता है?
प्रश्‍न- हां वही?
उत्‍तर- वो तो साला चूति‍या था
प्रश्‍न- क्‍यों?
उत्‍तर- नोट पर उसकी फोटो नहीं होनी चाहि‍ए
प्रश्‍न- क्‍यों?
उत्‍तर- भारत माता की फोटो होनी चाहि‍ए
प्रश्‍न- पर आपने अभी गांधी के बारे में कुछ कहा?
उत्‍तर- हां, सही कहा। चूति‍या था साला। अंग्रेजों का दलाल था
प्रश्‍न- वो कैसे?
उत्‍तर- अंग्रेजों का तलवा चाटकर उसने देश बांट दि‍या
प्रश्‍न- पर उन्‍होंने तो बंटवारे का वि‍रोध कि‍या था?
उत्‍तर- तुम राजनीति नहीं समझते हो
प्रश्‍न- क्‍या आपके फैजाबाद में भी कोई शहीद हुआ है?
उत्‍तर- पता नहीं
प्रश्‍न- अशफाक उल्‍ला खां को जानते हैं?
उत्‍तर- अरे हां, उनको हमारे यहां ही फांसी दी गई थी, परसों जेल गए थे तो नाम देखे थे
प्रश्‍न- क्‍यों फांसी दी गई थी?
उत्‍तर- डकैती डाली थी
प्रश्‍न- कहां?
उत्‍तर- कि‍सी बड़े हिंदू सेठ के घर
प्रश्‍न- जेल क्‍यों गए थे?
उत्‍तर- जाते रहते हैं दोस्‍तों से मि‍लने
प्रश्‍न- आपके दोस्‍त जेल में भी हैं?
उत्‍तर- कई हैं
प्रश्‍न- क्‍यों?
उत्‍तर- अरे वो लल्‍लन तो इसलि‍ए है कि जूता वाले की दुकान फूंक दि‍ये था पि‍छले साल दंगे में।
प्रश्‍न- पर वो तो कहता है कि सब झूठ है?
उत्‍तर- हां सब झूठ है। तुम भी बोलो सब झूठ है।
प्रश्‍न- असल में हुआ क्‍या था?
उत्‍तर- उसी से पूछना
प्रश्‍न- भगत सिंह के बम के दर्शन के बारे में क्‍या जानते हैं?
उत्‍तर- वीर भूमि से मुल्‍लों को भगाने के लि‍ए बम फोड़ने में कोई बुराई नहीं
प्रश्‍न- ये भगत सिंह ने कहा था?
उत्‍तर- और कौन कहेगा? वो सच्‍चे वीर थे
प्रश्‍न- ये बातें आपको कहां से पता चलीं?
उत्‍तर- सुबह टहलने जाते हैं, वहीं बात होती है
प्रश्‍न- सुबह कहां टहलने जाते हैं?
उत्‍तर- गुप्‍तारघाट, कभी कभी कंपनी गार्डन
प्रश्‍न- वहां कौन बताता है आपको?
उत्‍तर- हम लोग ही एक दूसरे को बताते हैं
प्रश्‍न- आप लोगों को कहां से पता चलती हैं?
उत्‍तर- लखनऊ कमांड से हम सबको रोज ईमेल मि‍लती हैं। वहां जाते हैं तो कि‍ताबें भी
प्रश्‍न- पैसे भी मि‍लते हैं?
उत्‍तर- पागल हो। ये हम सब खुद करते हैं। इसके लि‍ए पैसे की क्‍या जरूरत
प्रश्‍न- पैसे के लि‍ए क्‍या करते हैं?
उत्‍तर- ठेकेदारी। 

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