Saturday, March 14, 2015

हिंदी के चि‍रकुट धनी

फोटोकार: इरफ़ान 
हिंदी समाज कैसा तो धन्‍यभाव होकर अपनी अहमन्‍यता में नहाया चूति‍यानंदनकानन संसार है, अरे अरे अरे? फि‍राक की कि‍ताब (उर्दू भाषा और साहि‍त्‍य-हिंदी समि‍ति‍-1962) तो आपने पढ़ी नहीं होगी, कहां से पढ़ते घंटा, फेसबुक को अपने सूप से चालने से दम भर की फुरसत होती, तब ना पढ़ते! (मैत्रेयी जी गुप्‍ता जी के सौजन्‍य से हासि‍ल घटना से सीखकर उनकी चरण वंदना करते हुए) भाषा का गहरा अंधेरा, उसे जान और पहचान लेने की समझ होती, तब ना पढ़ते! हिंदी के चि‍रकुट धनी, ससुर मुंह खुलवाकर गंद मचवाने पर मुझे मजबूर मत करो, हालांकि मैं मजबूर हो रहा हूं। अबे दोजख में फंसे हुए धंसे नीचता के अंधेरे प्रति‍मूर्ति (शि‍वमूर्ति नहीं-वो जो लखनऊ वाले हैं- आपको नहीं कह रहा हूं सर), अबे तुमको कौन रास्‍ता दि‍खाएगा? हाइडलबर्ग दि‍खाएगा या न्‍यूयॉर्क? अबे तुम तो करोलबाग के भी काबि‍ल नहीं हो, रोहि‍णी में ही क्‍यों नहीं रहते रहे? आह, आह, ओ मेरे अल्‍ला, ओ मेरे मौला!! (जि‍नको अल्‍ला पढ़ना हो पढ़ें, घंटा मुझे कोई परवाह नहीं।) बि‍ना अयोध्‍या उर्दू मंडल खुले कुछ भी अच्‍छा नहीं होने वाला है। अयोध्‍या, तुम चिंता ना करो, उर्दू का मैदान बनाने मैं आ रहा हूं। मगर वो कौन चूति‍या थे ससुर जो दोजख को कबीर का मैदान बनाने पर आमादा हुए। अबे क्‍यूं रह रहे हो दि‍ल्‍ली वालों, शहर छोड़कर चले क्‍यूं नहीं जाते? माले की मीटिंग भी हो रही है, क्‍या उतना बहाना दि‍ल्‍ली से भागने के लि‍ए काफी नहीं? इंतजार हुसैन साहब, पूरी जिंदगी नि‍कल गई आपकी इंतजार करते-करते... (रेख्‍ता वाली मीटिंग में ही रहि‍एगा, माले वाली में मत चले जाइयेगा) राधे, तुम कहां हो? भारत किंबा अल्‍बर्ट पिंटो , क्‍या मजाल जो तुमने अभी मुंह खोला, बहुत पीटूंगा हरामी!! मसाला मुंह में रखे हूं इसका ये मतलब नहीं कि तुम मेरा जब चाहे गोड़ खींच लो। मर्द का बच्‍चा हो तो क्‍या मजाल कि तुम नरक देखने जाओ। नरक देखने जाओगे तो वापस सि‍नेमाहाल से बाहर नहीं आ पाओगे। कबीर के भजन की ऐसी कलात्‍मक दर्दनाक दुर्गत करने की हि‍म्‍मत तो डेवि‍ड धवन या कुमार सानू भी नहीं कर पाए। ऐसी दुर्दांत फि‍ल्‍मकारी कर दि‍ए कि सि‍द्धांत मोहन ति‍वारी तक उसकी समीक्षा नहीं कर पाए। और भावना, अगर तुम ये फि‍ल्‍म देखने गई तो बकबक का फ्रेंच और किर्गीज में अनुवाद करना भूल जाओगी, कानपुर का स्‍टेशन तक भूल जाओगी।

राधा, तुम कहां हो? तुमको सचमुच मन बहुत मि‍स कर रहा है। क्‍या सचमुच बंगाल भाग गई हो या कि‍सी मलयाली के साथ भागी हो? अब क्‍या बंगाली के साथ साथ मलयाली से भी नफरत करना शुरू कर दूं? वैसे तुम्‍हारे उस तफरीह वाले जीजा से सेपरेटली करने की गारंटी करने वाला कोश भी तैयार हो रहा है जो सुयश के कथित जुंबा और टि‍टिंबा कोश में इजाफा करेगा। (कोश को कोश ही समझें, ज्‍यादा सेंटीमेंटाने की जरूरत नहीं है)

माले की मीटिंग कल से है, कौन-कौन कामरेड आ रहे हैं? फि‍राक सत्र का संचालन मैं करूंगा।

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