Friday, January 23, 2015

एक खबर

मैं एक खबर लि‍खना चाहता हूं
मैं अब अपने बारे में एक खबर लि‍खना चाहता हूं
उस खबर में
मैं जि‍क्र करना चाहता हूं
अपना कामनाओं का
और वासनाओं का भी
अपनी नजरों का
और उनकी भरपूर गंदगी का भी
टि‍कुलि‍यों का,
और उनके पीछे झांकती अनजानी आस का भी
और हां,
अपने कुकर्मों का जि‍क्र अगर मैनें ना कि‍या
ये खबर पूरी तरह से बेस्‍वाद होगी
थोड़ा मसाला और डालना चाहता हूं इस खबर में
अपने कई सारे प्रेम संबंधों को साइड स्‍टोरी बनाकर
और सबकुछ होते हुए भी
मैं प्रेम के वि‍ज्ञापन क्‍यों नि‍कालता हूं
इस खबर में उसका भी जि‍क्र करना चाहता हूं
खबर के अंदर तस्‍वीरें भी डालना चाहता हूं
उन पलों की जि‍न्‍हें मैं जी ना पाया
जि‍नको जीने की उतनी शि‍द्दत थी
जि‍नको जीना जीने की इक इबादत थी
पर मैं इबादत वो क्‍यूं न कर पाया
खबर में वो भी रंग भरना चाहता हूं
और अंत तो नहीं ही है
फि‍र भी,
कुल मि‍लाकर
मैं एक खबर लि‍खना चाहता हूं।

चूंकि काश और आस, कि‍सी कि‍सी के ही पूरे होते हैं, इसलि‍ए वो खबर अभी के लि‍ए मुल्‍तवी की जाती है।

1 comment:

विभा रानी श्रीवास्तव said...

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" शनिवार 09 जनवरी 2016 को लिंक की जाएगी ....
http://halchalwith5links.blogspot.in
पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!