Sunday, January 4, 2015

मि‍लता है, मि‍लके ही रहता है

पजामा पहि‍न के बहुत आराम मि‍लता है
कुर्ता गर पहना तो बहुत नाम मि‍लता है।
लोहे से जुड़ो के बहुत काम मि‍लता है
जुड़ो जो तेल से, बड़ा ईनाम मि‍लता है।
सस्‍ते में अब कहां बहुत सामान मि‍लता है
महंगे की क्‍या पूछो, महंगा काम मि‍लता है।
बि‍छड़े हुए बच्‍चे का जो पैगाम मि‍लता है
के दीद कर ले उसकी, फि‍र शैतान मि‍लता है।
जब्‍त कीजि‍ए के मुंह ना खुलने दीजि‍ए
फि‍र देखि‍ए के कैसे ऐहतराम मि‍लता है।
हो जाती है ठि‍ठुर के टांगें ये सलाई
जाड़े में लुंगी का यही अंजाम मि‍लता है।
रोने से हो सुबह, खाली पेट कटती हैं रातें
गरीबों को रोज ये ही ईनाम मि‍लता है।
कहते रहो तुम के मौसम ये आशि‍काना है
हमको तो कमर दर्द का पैगाम मि‍लता है।
कौड़ि‍यों की खाति‍र बच्‍चा बन गया भि‍खारी
कि‍सने कहा के बच्‍चों में भगवान दि‍खता है...
मेमों को दि‍खते हैं इंसान हर तरफ
हमको तो साहबों में शैतान मि‍लता है।
कह दो के अलवि‍दा, के अब भगवान मि‍लता है
ताका करेंगे हम भी, के कब इंसान मि‍लता है।


Post a Comment