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Thursday, March 8, 2018

मैं महुआ बीनता हूं, आपको भी महुआ मिले

यह मेरी सफलता नहीं है। यह बिक चुकी भारतीय पत्रकारिता की असफलता है। लोगों को ताकत चाहिए। ताकत इन्फॉरमेशन से मिलती है, जो इंडियन मेनस्ट्रीम जर्नलिज्म नहीं दे पा रहा है। इंटरनेट ने ताकत चाहने वालों के सामने खुला खेत खोल दिया है। लोग ताकत ले रहे हैं, खेत जोत रहे हैं। लोग एक लाख घंटे से ज्यादा की ताकत पी चुके, वह भी तीन महीने में। तीन महीने पहले मैं मेनस्ट्रीम मीडिया से बुरी तरह से ऊब गया। टीवी तो वैसे भी नहीं देखता, लेकिन अखबार और इंटरनेट पर दिखते यलो जर्नलिज्म से मन खट्टा हो गया। तय किया कि सबकुछ असांजे की ही तर्ज पर करूंगा। खुद से वादा किया कि जो जैसा है, वैसा ही सामने रखना है, बगैर किसी ड्रामा के। किसी ने पूछा कि तुम बोलते हो या मशीन? उसके सवाल में मुझे मेरा जवाब मिल गया। असांजे गुरु, क्या सिखा दिया बे तुमने? जीवन में कभी वीडियो नहीं बनाई थी। प्रिंट का हूं, कैसे बनाता और क्यों ही बनाता? फिर दस दिन तक वीडियो बनाने वालों का पीछा करता रहा कि कुछ सिखा दें, मगर मुझे सिखाना उन्हें अपनी नौकरी का संकट लगा। फिर दुनिया के पास गया। बोला कि सिखाओ, और दुनिया ने वीडियो बनाना सिखा दिया। दुनिया है ना, सब सिखा देती है। मुझे पता है कि मैं वाहियात वीडियो बनाता हूं। उसमें कला कहीं नहीं होती। कला करनी भी नहीं है मैंने। सूचनाओं में कला होनी भी नहीं चाहिए, उनके अर्थ बदल जाते हैं। सूचनाएं कला करने में स्वयं सक्षम हैं, बशर्ते कोई दे तो सही। कोई बताए तो सही। अगर कहूं कि मैं सूचनाएं देता हूं तो यह पूरी तरह से गलत और झूठ होगा। मैं सिर्फ मैनेजर हूं, कलेक्टर हूं इन्फॉरमेशन का। सूचनाएं हमारे सामने ही होती हैं, बस हम फर्क नहीं कर पाते। सामने की सारी सूचनाएं इसी दुनिया से इकट्ठा करता हूं और इसी को दे देता हूं। जो है, वह सबका है, सबके लिए है। मैं महुआ बीनता हूं। नाक में महुआ बसा है। आपको भी महुआ मिले, मिलता रहे, इसी खुशबू के साथ-

सवा लाख से एक लड़ाऊँ 
चिड़ियों सों मैं बाज तड़ऊँ 

तबे गोबिंदसिंह नाम कहाऊँ

MORE POWER TO YOU..
MORE RISING TO YOU..

Monday, January 11, 2010

इसके लिए मंच नहीं, मन चाहिए....

इनके लिए मेरे पास कहने के लिए शब्द नहीं हैं, खुद देखिये और शब्द गढ़िये....