Wednesday, October 29, 2014

टुकुर टुकुर देखा केहेन

मन भर पि‍सान मि‍लै 
तौ देस महान बनै 
तबलेक तौ सूखा 
पतरका कि‍सान चलै। 
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एक जून खाब मि‍लै
चबैना हि‍साब मि‍लै
आलू हेरान बा
मि‍रचा परसाद मि‍लै।
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कनटरी से प्रेम पै
जेल बेहि‍साब मि‍लै
मांग लि‍हो जहां हक
गोली साफ साफ मि‍लै।
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मौजो खाओ ना झेलै जाओ
पइसा बेहि‍साब मि‍लै
सेना कि‍हि‍स घोसना
सबका आसपास मि‍लै।
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पइसा मि‍लै साफ मि‍लै
काला से हाफ मि‍लै
जमि‍नि‍या बचायो भाय
बेभाव के नाप मि‍लै।
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लोभी चहुं ओर मि‍लै
क्रोधी तौ साथ चलै
बचके बचाय ल्‍यो
सपरी तौ काल्‍ह मि‍लै।
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इहै पेड़ जंगल बा
जेसे हमका सांस मि‍लै
काटै पे तुला बाटे
कि कइसे अब फूल खि‍लै।
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दाम लिहि‍न दंभ कि‍हि‍न
रुपि‍या मा आग लगै
मोट मूस मोटान बाटै
सागौ में भाग लगै।
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उत्‍तर की तरफ जभै
टुकुर टुकुर देखा केहेन
दक्‍खि‍न से आवै आग
बाग सब खाक मि‍लै।
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समझा हो मोर बाबू
अब तो दुरभाग मि‍ले
उठावा मशाल अब
तभै भाेर भाग जलै।


- राइजिंग राहुल (अवध बीज भंडार, हरिंग्‍टनगंज मि‍ल्‍कीपुर खजुरहट वाले)

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