Saturday, January 31, 2015

नतमस्‍तक मोदक की नाजायज औलादें - (28)

प्रश्‍न- भारत का राष्‍ट्रपति कौन है?
उत्‍तर- नमो-नमो
प्रश्‍न- मजाक मत कीजि‍ए, वैसे भी चुनाव सि‍र पर हैं?
उत्‍तर- तुम भो**** के हमारे साले लगते हो ना जो तुमसे मजाक करेंगे?
प्रश्‍न- बताइये तो सही, राष्‍ट्रपति कौन है?
उत्‍तर- कै दि‍न से नहीं नहाए हो? देखो कान में कि‍तनी मैल जमी है
प्रश्‍न- राष्‍ट्रपति का नाम बताइये?
उत्‍तर- अबे अब सबकुछ नमो नमो है
प्रश्‍न- भारत में कुछ संवैधानि‍क पद हैं, व्‍यवस्‍थाएं हैं, क्‍या आप उनसे इन्‍कार करते हैं?
उत्‍तर- संवि‍धान में बहुत सारे चूति‍यापे हैं, हम उनसे इन्‍कार करते हैं
प्रश्‍न- आप के हि‍साब से वो क्‍या गलति‍यां हैं?
उत्‍तर- पहली गलती तो तुम्‍हीं हो भो*** के
प्रश्‍न- क्‍या मतलब पहली गलती मैं हूं?
उत्‍तर- जयंती रानी को देखो, जयंती रानी को। सही माल टूटा है
प्रश्‍न- और शाजि‍या इल्‍मी?
उत्‍तर- हाए.. नाम ना लो पंडत की झां*** उसका।
प्रश्‍न- जयंती को आप माल कहते हैं और शाजि‍या इल्‍मी पर आपकी हाए नि‍कलती है?
उत्‍तर- भो**** के, गां*** की झां****, का हम तुम्‍हरी बीवी को माल कहे
प्रश्‍न- खैर, राष्‍ट्रपति का नाम बताइये?
उत्‍तर- नमो नमो
प्रश्‍न- उपराष्‍ट्रपति का ही नाम बता दीजि‍ए?
उत्‍तर- आज शनि‍च्‍चर है, भगवान का दि‍न है
प्रश्‍न- कौन से भगवान का दि‍न है?
उत्‍तर- बजरंगबली। बोलो जै बजरंगबली
प्रश्‍न- क्‍या भारत का प्रधानमंत्री सेना की सलामी ले सकता है?
उत्‍तर- नहीं भो*** के, पहले तुम बोलो जै बजरंगबली
प्रश्‍न- मैं ये नहीं बोल सकता?
उत्‍तर- हमको पता था मा****, तुम अपना लं*** कटा के कलमा पढ़के बैठे हो
प्रश्‍न- मेरा धर्म मुझे चौराहे पर नंगा होकर नाचना नहीं सि‍खाता?
उत्‍तर- नंगी तो बेटा तुम्‍हरी बीबी नाच रही है, और तुमको नचाएगी, देखना तुम।
प्रश्‍न- सलामी वाले सवाल का जवाब दीजि‍ए?
उत्‍तर- जै बजरंगबली, तोड़ दुश्‍मन की नली
प्रश्‍न- ये दुश्‍मन की नली क्‍या चीज होती है?
उत्‍तर- लं*** होती है बे
प्रश्‍न- शुक्र है आप पुरुषों पर ही रहे?
उत्‍तर- भो*** के, शनि‍च्‍चर है आज अंधे साले। चार ठो चश्‍मा और लगा लो
प्रश्‍न- बजरंगबली का दुश्‍मन कौन है?
उत्‍तर- तुम्‍हरे जैसे कटुए हैं साले, और कौन है?
प्रश्‍न- मुझे लगता है कि आप हैं?
उत्‍तर- तुम साले हमको बजरंगबली का दुश्‍मन बता रहे हो, रुको, आज तो हम पक्‍का तुम्‍हारी गां** तोड़ते हैं?

Friday, January 23, 2015

एक खबर

मैं एक खबर लि‍खना चाहता हूं
मैं अब अपने बारे में एक खबर लि‍खना चाहता हूं
उस खबर में
मैं जि‍क्र करना चाहता हूं
अपना कामनाओं का
और वासनाओं का भी
अपनी नजरों का
और उनकी भरपूर गंदगी का भी
टि‍कुलि‍यों का,
और उनके पीछे झांकती अनजानी आस का भी
और हां,
अपने कुकर्मों का जि‍क्र अगर मैनें ना कि‍या
ये खबर पूरी तरह से बेस्‍वाद होगी
थोड़ा मसाला और डालना चाहता हूं इस खबर में
अपने कई सारे प्रेम संबंधों को साइड स्‍टोरी बनाकर
और सबकुछ होते हुए भी
मैं प्रेम के वि‍ज्ञापन क्‍यों नि‍कालता हूं
इस खबर में उसका भी जि‍क्र करना चाहता हूं
खबर के अंदर तस्‍वीरें भी डालना चाहता हूं
उन पलों की जि‍न्‍हें मैं जी ना पाया
जि‍नको जीने की उतनी शि‍द्दत थी
जि‍नको जीना जीने की इक इबादत थी
पर मैं इबादत वो क्‍यूं न कर पाया
खबर में वो भी रंग भरना चाहता हूं
और अंत तो नहीं ही है
फि‍र भी,
कुल मि‍लाकर
मैं एक खबर लि‍खना चाहता हूं।

चूंकि काश और आस, कि‍सी कि‍सी के ही पूरे होते हैं, इसलि‍ए वो खबर अभी के लि‍ए मुल्‍तवी की जाती है।

Friday, January 9, 2015

कि‍तने सीने चाक करोगे?

कि‍तने सीने चाक करोगे?
कि‍तने पन्‍ने राख करोगे?
कलमों के कोरो से हम सब
हर सुबह नई बनाएंगे
यूं ही ना मि‍ट पाएंगे
यूं ही ना मि‍ट पाएंगे।

दस मारोगे, सौ आएंगे
बंदूकों से ना डर पाएंगे
नफरत जि‍ससे तुम करते हो
प्रेम गीत वो हम गाएंगे
गीत हमारे गाने पर तुम
गोली से इंसाफ करोगे?
कि‍तने सीने चाक करोगे?
कि‍तने पन्‍ने राख करोगे?

पैगंबर की ध्‍वजा उठाकर
हरे रंग पर लहू बि‍छाकर
लाशों का अंबार लगाकर
कैसे खुद को माफ करोगे?
कि‍तने सीने चाक करोगे?
कि‍तने पन्‍ने राख करोगे?

हंस हंस के हम चलते हैं
तो दुनि‍या आगे बढ़ती है
हंसने पे गोली चलती है
तो दुनि‍या रंग बदलती है।
अब हंसी का तुम हि‍साब करोगे?
कि‍तने चेहरे खाक करोगे?
कि‍तने पन्‍ने राख करोगे?

हो जाएगी दुनि‍या वीरानी
सांसे होंगी तब बेइमानी
ये नहीं तुम्‍हारी नादानी
अब पत्‍थर में जज्‍बात भरोगे?
कि‍तने सीने चाक करोगे?
कि‍तने पन्‍ने राख करोगे?

कि‍तने सीने चाक करोगे?
कि‍तने पन्‍ने राख करोगे?
कलमों के कोरो से हम सब
हर सुबह नई बनाएंगे
यूं ही ना मि‍ट पाएंगे
यूं ही ना मि‍ट पाएंगे।

‪#‎CharlieHebdo‬
‪#‎ParisShooting‬
‪#‎JeSuisCharlie‬

Sunday, January 4, 2015

मि‍लता है, मि‍लके ही रहता है

पजामा पहि‍न के बहुत आराम मि‍लता है
कुर्ता गर पहना तो बहुत नाम मि‍लता है।
लोहे से जुड़ो के बहुत काम मि‍लता है
जुड़ो जो तेल से, बड़ा ईनाम मि‍लता है।
सस्‍ते में अब कहां बहुत सामान मि‍लता है
महंगे की क्‍या पूछो, महंगा काम मि‍लता है।
बि‍छड़े हुए बच्‍चे का जो पैगाम मि‍लता है
के दीद कर ले उसकी, फि‍र शैतान मि‍लता है।
जब्‍त कीजि‍ए के मुंह ना खुलने दीजि‍ए
फि‍र देखि‍ए के कैसे ऐहतराम मि‍लता है।
हो जाती है ठि‍ठुर के टांगें ये सलाई
जाड़े में लुंगी का यही अंजाम मि‍लता है।
रोने से हो सुबह, खाली पेट कटती हैं रातें
गरीबों को रोज ये ही ईनाम मि‍लता है।
कहते रहो तुम के मौसम ये आशि‍काना है
हमको तो कमर दर्द का पैगाम मि‍लता है।
कौड़ि‍यों की खाति‍र बच्‍चा बन गया भि‍खारी
कि‍सने कहा के बच्‍चों में भगवान दि‍खता है...
मेमों को दि‍खते हैं इंसान हर तरफ
हमको तो साहबों में शैतान मि‍लता है।
कह दो के अलवि‍दा, के अब भगवान मि‍लता है
ताका करेंगे हम भी, के कब इंसान मि‍लता है।


Thursday, January 1, 2015

क्‍योंकि आप फेसबुक पर हैं

अगर फैज के ठीक नीचे
आपको नरेंद्र मोदी दि‍खाई दे
तो समझि‍ये कि आप
फेसबुक पर हैं।

भूलिये मत
क्‍योंकि अगली तस्‍वीर आपको
तीसरे मोर्चे की भी दि‍खाई दे सकती है
जंतर मंतर पर हाथ उठाए
रि‍श्‍तेदारी बांधे
क्‍योंकि आप
फेसबुक पर हैं।

अगला स्‍टेटस आपको
एक न चाहती हुई
कवि‍ता भी दि‍खाई दे सकती है
जि‍से आप बि‍लकुल भी पसंद नहीं करते
फि‍र भी लाइक कर देते हैं
क्‍योंकि आप
फेसबुक पर हैं।

इसी बीच एक बि‍ल्‍लि‍यों का वीडि‍यो
एन कवि‍ता के नीचे दि‍खाई देता है
और आप कवि‍ता छोड़कर
वो वीडि‍यो देखने लगते हैं
क्‍योंकि आप
फेसबुक पर हैं।

वीडि‍यो शेयर करने के बाद
आपको दि‍खती है
टांगों से पेंट करने वाली बच्‍ची
और आप उसे तुरंत शेयर करते हैं
क्‍योंकि आप
फेसबुक पर हैं

ठीक उसी के नीचे
आपको मि‍लती है
आप जैसे हर कि‍सी से तंग
एक बेरंग सी पोस्‍ट
जि‍समें है
आपके हर सही को गालि‍यां
आप चुपचाप आगे बढ़ जाते हैं
क्‍योंकि आप
फेसबुक पर हैं।

मान्‍यताओं के समाज में
हम मान्‍यताएं देते देते
कभी भी नहीं थकते।