Sunday, December 1, 2013

परत दर परत नीचे

नॉर्थ कोरि‍या के युयुत्‍सु जि‍ले के प्‍योंगसांग गांव में आई भीषण वि‍भीषि‍का में सैकड़ों लोग गांव के दाहि‍ने तरफ वाले टीले पर फंसे हुए थे।

हड्डी वि‍ज्ञानी डा. पिंटू ति‍वारी ने उन्‍हें नीचे उतारने की चीनी वि‍धि वाली योजना बनाई।

हालांकि भूगर्भ वि‍ज्ञानी डा.भारत का कहना था कि टीले को नीचे से खोदा जाए तो वो लोग परत दर परत नीचे आ
जाएंगे।

सैन मातेओ जि‍ले के पोर्टोला वैली कस्‍बे में

अमेरि‍का के फोनि‍क्‍स में तीन दि‍न चार रात लगातार मौसम का अध्‍ययन करने के बाद हम उसी देश के सैन मातेओ जि‍ले के पोर्टोला वैली कस्‍बे में
पहुंचे।

वहां की गर्मी और कुकुरमुत्‍ते की तरह उगे मैक्‍डॉनल्‍ड के बर्गर और फ्रेंच फ्राई खा-खाकर हमारा पेट खराब हो चुका था। पोर्टोला वैली कस्‍बे में हमें कच्‍चे मांस का आयात करने वाले पीटरसन मि‍ले।

पीटरसन ने हमें राजमा चावल और रायता उबले अंडों के साथ खाने को दि‍या। साथ में वहां की देसी शराब भी थी।
(जल-फल और कल वि‍ज्ञानी डा. राहुल रि‍पोर्टिंग वि‍द मौसम और हड्डी वि‍ज्ञानी डा. पिंटू ति‍वारी एंड भूगर्भ और आसमान वि‍ज्ञानी डा. भारत सिंह)

एक नया वि‍श्‍व रि‍कॉर्ड

और लीजि‍ए, बना दि‍या एक नया वि‍श्‍व रि‍कॉर्ड. हम अमेरि‍का के सबसे गर्म शहर फोनि‍क्‍स के पलोमा गांव में मौसम के अध्‍ययन के लि‍ए गए।

वहां हमने (जल-फल व मौसम वि‍ज्ञानी राहुल व हड्डी तथा चट्टान वि‍ज्ञानी डा.पिंटू ति‍वारी) सबसे गर्म चट्टान पर पूरे साढ़े 17 सेकेंड तक खुद को टि‍काए रखा।

हालांकि हमारे साथ भूगर्भ विज्ञानी भारत सिंह भी थे, पर उन्‍होंने खुद को हमारे जले बदन के इलाज के लि‍ए बचाए रखा। बाद में बरनॉल उन्‍हीं ने लगाया।

अमरूद और सेब के निषेचन से उपजा उन्‍नत कि‍स्‍म का फल

तजाकि‍स्‍तान के दि‍शि‍खेर और देवान गांव के बीच भीषण सूखाग्रस्‍त इलाकों में मुआयना करने के बाद अमरूद और सेब के निषेचन से उपजे उन्‍नत कि‍स्‍म का फल
दि‍खाते घास फूस और फल फूल वि‍ज्ञानी राहुल। उम्‍मीद है कि इस एक छोटे से फल से हम एक बोरी चीनी बनाने में महारत हासि‍ल कर लेंगे। (साथ में पशु वि‍ज्ञानी भारत और हड्डी वि‍ज्ञानी पिंटू ति‍वारी)

पत्‍थर पर राम लि‍ख लि‍खकर नदी में फेंका

तस्‍वीर उस वक्‍त की है जब हम लोग आर्मेनि‍या में थे और लगातार होती बारि‍श के चलते बाढ़ में फंस गए थे। दो दि‍न तक हमने रामायण से प्रेरणा ली और पत्‍थर पर राम लि‍ख लि‍खकर नदी में फेंका... इसके बाद भी पुल न बन पाया तो हमारे भूगर्भ वि‍शेषज्ञ भारत सिंह ने दूसरे तरीके से हमें नदी पार करा
ई।